गधा बना पहरेदार

गधा बना पहरेदार

बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक धोबी के पास एक गधा और एक कुत्ता था। धोबी जब दोपहर में घर खाना खाने जाता था, तो गधे को धूप में और कुत्ते को छाँव में बांधकर जाता था। एक दिन गधे ने कुत्ते से पूछा, “यह धोबी हर रोज मुझे धूप में और तुम्हें छाँव में क्यों बांधकर जाता है?”

यह सुनकर कुत्ता बोला, “मैं रात में जागकर रखवाली करता हूँ, इसलिए मालिक मुझे छाँव में बांधकर जाता है ताकि मैं आराम से सो सकूं। तुम्हें मालिक इसलिए धूप में बांधकर जाता है कि कहीं तुम सो गए तो, रातभर जागकर मालिक की नींद ख़राब करोगे। समझे गधे महाराज।”

यह सुनकर गधे को गुस्सा आ जाता है। गधा कसम खाता है कि आज से वह भी रात को जागकर रखवाली करेगा। उसी दिन रात को जब मालिक सोया हुआ था। घर में चोर घुस आते हैं। गधे ने चोरों को देख लिया। गधा धीरे-से कुत्ते को जगाते हुए बोला, “अरे तुम मालिक को सावधान करदो। देखते नहीं घर में चोर घुस आए हैं।”

कुत्ता गुस्से से बोला, “मुझे परेशान मत करो और मुझे सोने दो। जब मालिक मुझे ढंग का खाना नहीं देता, तो मैं भी क्यों उसकी मदद करूं। अच्छी बात है जब चोर सबकुछ चोरी करके ले जाएँगे तब मालिक की अक्ल ठिकाने आएगी।”

यह सुनकर गधा हैरान हो गया। गधे के दिमाग में एक तरकीब आई है और उसने मालिक को सतर्क करने के लिए खुद आवाज़ निकालनी शुरू करदी। गधे की आवाज़ सुनते ही चोर वहाँ से भाग जाते हैं। गधा खुशी से और ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ निकालने लगता है। गधे की आवाज़ सुनकर धोबी की नींद खुल जाती है। धोबी ने उठकर चारों तरफ देखा। वहाँ पर कोई भी नहीं था। धोबी को गुस्सा आया कि गधे ने उसकी नींद खराब करदी। धोबी लाठी लेकर उसे पीटने लगता है। थोड़ी देर बाद जब धोबी लाठी रखकर सो जाता है तब गधे ने कुत्ते से पूछा, “तुमने तो अपना काम भी नहीं किया। चोरों के आने पर भी तुम शांती से सोते रहे। मैंने तो मालिक की मदद की और बदले में मुझे मार पड़ी। मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ ?

कुत्ता हँसकर बोला, “मैंने चोरों को तुमसे पहले ही देख लिया था। मैं तो तुम्हें बस यह समझाना चाहता था कि हमें अपने काम में ध्यान देना चाहिए। दूसरों के सुखों से दुखी नहीं होना चाहिए। तुम मेरे जैसा बनना चाहते थे, जिस कारण तुम्हें मार पड़ी। मैं अगर तुम्हारी तरह रात में सोने लगा और दिन में जागने लगा तो शायद मेरा भी हाल तुम्हारे जैसा ही होगा और मालिक से प्यार के बदले मार पड़ेगी। इसलिए हमेशा याद रखो – हम जैसे हैं, वैसे ही अच्छे हैं।”

गधा, “सही कहते हो दोस्त। चलो अब मुझे सोना है।” दोनों ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगते हैं।

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