गुरु और चेला

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक रिमझिम में संकलित कविता ‘गुरु और चेला’ पर आधारित वर्कशीट।

प्रश्न – कविता के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजीए-

गुरु एक थे और था एक चेला,

चले घूमने पास में था न धेला।

चले चलते-चलते मिली एक नगरी,

चमाचम थी सड़कें चमाचम थी डगरी।

मिली एक ग्वालिन धरे शीश गगरी,

गुरु ने कहा तेज़ ग्वालिन न भग री।

बता कौन नगरी, बता कौन राजा,

कि जिसके सुयश का यहाँ बजता बाजा।

 

कहा बढ़के ग्वालिन ने महाराज पंडित,

पधारे भले हो यहाँ आज पंडित।

यह अंधेर नगरी है अनबूझ राजा,

टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।

गुरु ने कहा-जान देना नहीं है,

मुसीबत मुझे मोल लेना नहीं है।

न जाने की अंधेर हो कौन छन में?

यहाँ ठीक रहना समझता न मन में।

 

1. कविता का क्या नाम है ?

2. नगरी की सड़कें कैसी थी ?

3. गुरु ने ग्वालिन से क्या पूछा ?

4. नगरी में भाजी का क्या रेट (मूल्य) था ?

5. गुरु को क्या अच्छा नहीं लग रहा था ?

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