जब सुदामा चले कृष्ण से मिलने

जब सुदामा चले कृष्ण से मिलने

आज के युग में अगर हम दोस्ती की मिसाल देना चाहते हैं तो वह कृष्ण और सुदामा की है। कृष्ण और सुदामा बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त थे। एक दिन सुदामा ने श्री कृष्ण से मिलने की सोची, पर उसके पास श्रीकृष्ण को भेंट देने के लिए कुछ भी नहीं था। इसलिए वह उदास हो गया।

सुदामा की पत्नी ने कहा, “आप उदास ना हों। ये चावल श्री कृष्ण जी को भेंट दे देना।”

सुदामा बोले, “मैं बहुत गरीब हूँ और श्री कृष्ण एक राजा हैं। मैं कैसे जाऊं ये चावल लेकर उसके घर? ”

सुदामा की पत्नी ने सुदामा को समझाया और चावल एक कपड़े में लपेट कर सुदामा को दे दिए। सुदामा धीरे-धीरे चलता हुआ श्रीकृष्ण के घर के पास पहुँच जाता है। सुदामा की वेशभूषा देखकर वहाँ खड़े द्वारपालों ने सुदामा को महल में आने से रोक दिया।

तब सुदामा बोले “मैं और श्रीकृष्ण बचपन के दोस्त हैं। श्री कृष्ण से जाकर कहो कि उनका दोस्त सुदामा आया है।”

जैसे ही श्री कृष्ण जी ने सुना वह दौड़े-दौड़े आए और सुदामा को गले लगा लिया। जब उन्होंने देखा कि सुदामा कुछ छुपा रहे हैं तो जिद करके उनसे वह देखना चाहा। श्रीकृष्ण कि जिद करने पर सुदामा ने उन्हें वह चावलों की पोटली दिखा दी। श्री कृष्ण जी ने चावल खुशी से खाए। यह देखकर सब हैरान रह गए। इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें भेदभाव नहीं करना चाहिए।

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