तीन हज़ार साल बाद

 

तीन हज़ार साल बाद………

              एक बार एक वैज्ञानिक ने एक ऐसी मशीन बनाई जिससे मनुष्य अपने भविष्य में जा सकते थे। वह बहुत खुश हुआ। उस वैज्ञानिक ने सभी को उस मशीन के बारे में बताया।

उसने सोचा कि इस मशीन का प्रयोग वह सबके सामने करेगा। उसने मीडियाकर्मियों को भी बुला लिया और बड़े-बड़े नेता भी उसकी मशीन को देखने के लिए आ गए। उसने उस मशीन से जुड़ा हुआ एक ऐसा उपकरण भी बनाया जिससे भविष्य में गया हुआ मनुष्य वर्तमान में बैठे व्यक्तियों से बात कर सके। सबसे पहले एक बच्चे ने इच्छा जताई कि तीन हज़ार साल बाद हमारी पृथ्वी कैसी होगी यह उस समय में जाकर बताया जाए। वह वैज्ञानिक उस मशीन में बैठकर तीन हज़ार साल बाद कि दुनिया में पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर उसने जो सन्देश भेजा वह उस वैज्ञानिक का आख़री सन्देश था। यह संदेश सबको डरा देने वाला था। उस वैज्ञानिक ने सन्देश भेजा लिखा, “मैं एक ऐसी दुनिया में पहुँच गया हूँ जहाँ कोई भी पेड़-पौधा नहीं है। पुरानी इमारते हैं जो पूरी तरह टूट गई हैं। यहाँ कोई मनुष्य नहीं दिखाई दे रहा। मैं वापस अपनी दुनिया में आना चाहता हूँ लेकिन अब मैं कभी वापस नहीं आ पाउँगा क्योंकि एक चींटी ने मेरी मशीन तोड़ दी है। इस दुनिया में केवल चींटियाँ और कॉकरोच हैं जिनका आकार चार-चार हाथियों से भी बड़ा है। ये मुझे भी खा जाएँगे। मुझे बचाओ मुझे बचाओ।” इसके बाद न वो वैज्ञानिक वापस आया और न दोबारा उसकी आव़ाज। तब सभी लोगों ने मिलकर यह निश्चय किया कि हम इस दुनिया को बचाने के लिए इसे हरा-भरा रखेंगे। और पेड़-पौधे लगाएँगे। इसके पाँच साल बाद उस वैज्ञानिक के एक शिष्य ने एक ऐसी मशीन बनाई जिससे हम भविष्य में तो नहीं जा सकते पर भविष्य का दृश्य देख सकते थे।

 

इस मशीन से उसने देखा कि हमारी पृथ्वी तीन हज़ार साल बाद भी हरी-भरी है और इंसान ने सभी रोगों की दवाइयाँ बना ली हैं। साथ ही उसने देखा कि मनुष्य की आयु औसतन तीन सौ वर्ष हो गई है। अब यह हमारे हाथ में हैं कि हम आने वाली जाती को कैसी दुनिया देना चाहते हैं। तो आओ पेड़ लगाएँ…..

कशिश बंसल

कक्षा – अष्टम