दादी माँ

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक वसंत में संकलित पाठ ‘दादी माँ’ पर आधारित वर्कशीट।

प्रश्न – अवतरण के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए–

दादी माँ

दिन में मैं चादर लपेटे सोया था। दादी माँ आईं, शायद नहाकर आई थीं, उसी झागवाले जल में। पतले-दुबले स्नेह-सने शरीर पर सफ़ेद किनारीहीन धोती, सन-से सफ़ेद बालों के सिरों पर सद्यः टपके हुए जल की शीतलता। आते ही उन्होंने सर, पेट छुए। आँचल की गाँठ खोल किसी अदृश्य शक्तिधारी के चबूतरे की मिट्टी मुँह में डाली, माथे पर लगाई। दिन-रात चारपाई के पास बैठी रहतीं, कभी पंखा झलतीं, कभी जलते हुए हाथ-पैर कपड़े से सहलातीं, सर पर दालचीनी का लेप करतीं और बीसों बार छू-छूकर ज्वर का अनुमान करतीं। हाँडी में पानी आया कि नहीं? उसे पीपल की छाल से छौंका कि नहीं? खिचड़ी में मूंग की दाल एकदम मिल तो गई है? कोई बीमार के घर में सीधे बाहर से आकर तो नहीं चला गया, आदि लाखों प्रश्न पूछ-पूछकर घरवालों को परेशान कर देतीं।

1. दादी माँ कहाँ से आई थी ?     

2. दादी के बालों का रंग कैसा था ?                            

3. दादी ने सर, पेट क्यों छुए ? 

4. दादी बुखार (ज्वर) को उतारने के लिए क्या – क्या उपाए करती थी ?    

5. दादी घरवाले को कैसे प्रश्न पूछकर परेशान कर देती थी ?

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अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

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