बहादुर दोस्त

बहादुर दोस्त

एक बार की बात है तीन दोस्त दिलबर, मकरंद और कुमार कहीं घूमने जा रहे थे। घूमते-घूमते वे तीनों दोस्त अपना रास्ता भटक जाते हैं और एक सुनसान जंगल में पहुँच जाते हैं। वहाँ उन्हें जंगल के डाकू पकड़ लेते हैं। उन तीनों दोस्तों के पास कुछ नहीं था। जब जंगली डाकूओं को उनके पास से कुछ भी नहीं मिला तो उन्होंने तीनों दोस्तों को मारने का फैंसला किया। तभी  दिलबर को एक तरकीब सूझी। वो बोला, “मुझे मत मारो मेरे पास पाँच लाख रूपए का खजाना है। तुम चाहो तो मैं तुम्हें लाकर दे सकता हूँ।“

डाकू ने तुरन्त सवाल किया, “अगर तुम भाग गए तो ?”

दिलबर बोला, “अगर मैं लौटकर नहीं आया तो मेरे दोनों दोस्तों को जान से मार देना।“

मकरंद और कुमार ने दिलबर की तरफ गुस्से से देखा, क्योंकि उन्हें पता था कि दिलबर के पास कोई खजाना नहीं है। तभी दिलबर ने उन्हें आँख से इशारा किया। इशारा करते ही मकरंद और कुमार समझ गए कि दिलबर यहाँ से बचकर निकलने की योजना बना रहा है।

तभी मकरंद बोला, “मेरे पास भी दो लाख रुपए हैं।“

कुमार बोला, “मेरे पास भी लगभग तीन लाख रुपए हैं।“

तीनों दोस्तों की बातें सुनकर डाकूओं के मन में लालच आ जाता है। डाकूओं का मुखिया बोला चलो हमें खजाने के पास लेकर चलो। डाकू और तीनों दोस्त चल देते हैं। चलते-चलते वे एक पुरानी हवेली के पास जा पहुँचते हैं। दिलबर कहता हैं, “हम तीनों के खजाने इसी हवेली में हैं। परन्तु हम इस हवेली में नहीं जा सकते क्योंकि इसके अन्दर एक खतरनाक भूत रहता है जो अन्दर आने वाले को खा जाता है। हम इस हवेली में केवल रविवार को जा सकते हैं। रविवार को वह भूत अपने दोस्तों से मिलने जाता है। आज सोमवार है हमें एक सप्ताह का इन्तजार करना होगा।“ यह सुनकर डाकूओं के मुखिया को गुस्सा आ जाता है और वह कहता है, “नहीं तुम्हें आज ही वह खजाना लाना होगा। नहीं तो मैं तुम्हें मार दूँगा।“ डाकू तीनों दोस्तों को अन्दर भेज देता है। अन्दर पहुंचकर तीनों दोस्त खुश हो जाते हैं उन्हें पता था कि अन्दर कोई खजाना नहीं है। तीनों दोस्त ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगते हैं, “बचाओ…. बचाओ…. डाकू अंकल बचाओ।“ यह सुनकर डाकू डर जाते हैं और भाग जाते हैं। कुछ देर के बाद तीनों दोस्त वहाँ से निकलकर घर आ जाते हैं। फिर वे पुलिस को जाकर पूरी घटना बताते हैं। पुलिस इंस्पेक्टर को यह यकीन हो जाता हैं कि वे डाकू खजाने की तलाश में रविवार को जरूर उस हवेली में आएँगे। रविवार को पुलिस इंस्पेक्टर कुछ पुलिसवालों को लेकर जाता है और उस हवेली में जाकर छिप जाता है। जब डाकू हवेली में आते हैं तो पुलिस उन्हें पकड़ लेती है। अगले दिन अखबारों में तीनों बहादुर दोस्तों की कहानी छपती है और सब उनकी प्रशंसा करते हैं।

दिलबर सिंह दिलजीत

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