बेचारा बैल

बेचारा बैल

 

एक लड़का था, उसका नाम टीकू था। वह बहुत तेज़ था। वह हर प्रश्न का हल खोजता रहता था। एक दिन उसने एक बैल को कोल्हू में काम करते हुए देखा। वह बैल चुपचाप बिना चिल्लाए काम कर रहा था। उसे आश्चर्य हुआ कि वह बैल चिल्ला क्यों नहीं रहा।

 

एक दिन उसने बैल के मालिक से पूछा, “जब आपका ध्यान कहीं और होता है या जब आप कमरे में होते हैं तब भी यह बैल चुपचाप बिना चिल्लाए कैसे काम करता रहता है?“

मालिक बोला, “अरे! तुम्हें दिखता नहीं मैंने इस बैल के गले में एक घंटी लगाई है। जब तक मुझे घंटी की आव़ाज सुनती रहती है, मुझे पता लगता रहता है कि बैल काम कर रहा है। जैसे ही आव़ाज आनी बंद हो जाती है, मैं बाहर आकर बैल को दो डंडे लगा देता हूँ।“

 

टीकू हँसता हुआ बोला, “अरे! अगर किसी दिन आप कमरे में आराम कर रहे हों और बैल को चालाकी सूझे तब यह एक जगह खड़ा होकर गर्दन हिलाता रहेगा और आपका समय खराब हो जाएगा। इसलिए कोई नया उपाए खोजो।“

मालिक हँसता हुआ बोला, “बेटा टीकू! जहाँ से यह ज्ञान लेकर आए हो वहीं जाहर बांटों क्योंकि हमारा बैल अनपढ़ है। इसे इतना ज्ञान अभी नहीं है कि इतनी चालाकी कर सके।“

दोनों ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगते हैं।

प्रभजाप

कक्षा – चतुर्थ