भगवान के डाकिए

हिन्दी पाठ्यपुस्तक वसंत में संकलित कविता ‘भगवान के डाकिए’ पर आधारित वर्कशीट।

प्रश्न – कविता के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

भगवान के डाकिए

पक्षी और बादल,

ये भगवान के डाकिए हैं,

जो एक महादेश से

दूसरे महादेश को जाते हैं।

हम तो समझ नहीं पाते हैं

मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ

पेड़, पौधे, पानी और पहाड़

बाँचते हैं।

 

हम तो केवल यह आँकते हैं

कि एक देश की धरती

दूसरे देश को सुगंध भेजती है।

और वह सौरभ हवा में तैरते हुए

पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।

और एक देश का भाप

दूसरे देश में पानी

बनकर गिरता है।

 

1. पक्षी एक महादेश से दूसरे किस स्थान पर जाते हैं ?

2. एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है ?

3. पक्षियों के पंखों पर क्या तिरता है ?

4. एक देश का भाप दूसरे देश में क्या बनकर गिरता है ?

5. ‘हम तो केवल यह आँकते हैं’ में ‘आँकते हैं’ का क्या अर्थ है ?

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

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झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

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लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

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