मन के भोले-भोले बादल

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक रिमझिम में संकलित कविता ‘मन के भोले-भोले बादल’ पर आधारित वर्कशीट।

प्रश्न – कविता के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

झब्बर-झब्बर बालों वाले

गुब्बारे से गालों वाले

लगे दौड़ने आसमान में

झूम-झूम कर काले बादल।

कुछ जोकर-से तोंद फुलाए

कुछ हाथी-से सूँड़ उठाए

कुछ ऊँटों-से कूबड़ वाले

कुछ परियों-से पंख लगाए

आपस में टकराते रह-रह

शेरों से मतवाले बादल।

 

कुछ तो लगते हैं तूफानी

कुछ रह-रह करते शैतानी

कुछ अपने थैलों से चुपके

झर-झर-झर बरसाते पानी

नहीं किसी की सुनते कुछ भी

ढोलक-ढोल बजाते बादल।

 

(क) बादल आसमान में दौड़ कैसे लगाते हैं ?

(ख) बादल आपस में किसकी तरह टकराते हैं ?

(ग) बादल झर-झर पानी कहाँ से बरसाते हैं ?

(घ) किसी की सुने बिना बादल क्या करते रहते हैं ?

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

भगवान के डाकिए

मन करता है

झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

राख की रस्सी

लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

सबसे अच्छा पेड़

साथी हाथ बढ़ाना

सूरदास के पद

हिमालय की बेटियाँ