मिर्च का मज़ा

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक रिमझिम में संकलित कविता ‘मिर्च का मज़ा’ पर आधारित वर्कशीट।

प्रश्न – कविता के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

मिर्च का मज़ा

एक काबुलीवाले की कहते हैं लोग कहानी,

लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुहँ में पानी।

सोचा, क्या अच्छे दाने हैं, खाने से बल होगा,

यह, जरूर इस मौसम का कोई मीठा फल होगा।

 

एक चवन्नी फ़ेंक और झोली अपनी फैलाकर,

कुंजड़िन से बोला बेचारा ज्यों-ज्यों कुछ समझाकर।

लाल-लाल, पतली छीमी हो चीज़ अगर खाने की,

तो हमको दो तोल छीमियाँ चार आने की।

 

1. काबुलीवाले के मुहँ में पानी क्यों आ गया था ?

2. काबुलीवाले ने मिर्च को कैसा फल समझ लिया था ?

3. काबुलीवाला कुंजड़िन से क्या बोला ?

4. काबुलीवाले ने कितने आने की छीमियाँ तोलने को कहा ?

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

भगवान के डाकिए

मन करता है

झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

राख की रस्सी

लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

सबसे अच्छा पेड़

साथी हाथ बढ़ाना

सूरदास के पद

हिमालय की बेटियाँ

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