राख की रस्सी

हिन्दी पाठ्यपुस्तक रिमझिम में संकलित पाठ ‘राख की रस्सी’ पर आधारित वर्कशीट।

प्रश्न – अवतरण के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

राख की रस्सी

लोनपो गार तिब्बत के बत्तीसवें राजा सौनगवसैन गांपो के मंत्री थे। वे अपनी चालाकी और हाजिरजवाबी के लिए दूर-दूर तक मशहूर थे। कोई उनके सामने टिकता न था। चैन से जि़ंदगी चल रही थी। मगर जब से उनका बेटा बड़ा हुआ था उनके लिए चिता का विषय बना हुआ था। कारण यह था कि वह बहुत भोला था। होशियारी उसे छूकर भी नहीं गई थी। लोनपो गार ने साचे “मेरा बेटा बहुत सीधा-सादा है। मेरे बाद इसका काम कैसे चलेगा!” एक दिन लोनपो गार ने अपने बेटे को सौ भेड़ें देते हुए कहा, “तुम इन्हें लेकर शहर जाओ। मगर इन्हें मारना या बेचना नहीं। इन्हें वापस लाना सौ जौ के बोरों के साथ। वरना मैं तुम्हें घर में नहीं घुसने दूँगा।“ इसके बाद उन्होंने बेटे को शहर की तरफ रवाना किया।

1. लोनपो गार कौन था ?

2. लोनपो गार की चिंता का विषय क्या था ?

3. लोनपो गार का बेटा कैसा था ?

4. लोनपो गार ने अपने बेटे को सौ भेड़े देते हुए क्या करने को कहा ?

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

भगवान के डाकिए

मन करता है

झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

राख की रस्सी

लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

सबसे अच्छा पेड़

साथी हाथ बढ़ाना

सूरदास के पद

हिमालय की बेटियाँ