लालच बुरी बला

लालच बुरी बला

एक बहुत ईमानदार लड़का था। वह दूसरी कक्षा में पढ़ता था और वह बहुत होशियार था। उसकी कक्षा में एक और लड़का था। वह बहुत लालची था। एक दिन ईमानदार लड़का स्कूल में पचास रूपए लेकर आया। ईमानदार लड़के ने पाँच रुपए की एक चाकलेट स्कूल की कैंटीन से खरीदी और बचे हुए पैसे अपने बैग में रख दिए। लालची लड़के ने ईमानदार लड़के को बैग में पैसे रखते हुए देख लिया। जब सभी कक्षा से बाहर गए तब लालची लड़के ने ईमानदार लड़के के बैग से पैसे चुरा लिए। थोड़ी देर बाद जब ईमानदार लड़के को पता चला कि उसके पैसे चोरी हो गए हैं तो वह रोने लगा। थोड़ी देर बाद अध्यापक कक्षा में आए। अध्यापक ने सबकी बात सुनी। अध्यापक ने सबके बैग चैक किए। चोरी किए हुए पैसे लालची लड़के के बैग में से मिले। अध्यापक के डांटने पर लालची लड़के ने चोरी स्वीकार की और सबसे माफी माँगी।

शिक्षा – इस कहानी से हमे शिक्षा मिलती है कि हमे कभी चोरी नहीं करनी चाहिए।

दिलबर सिंह दिलजीत

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