हमसे क्या चाहते हैं माँ-बाप !

हमसे क्या चाहते हैं माँ-बाप !

हमारी दुनिया एक जंगल की तरह है, जिसमें हर कदम सोच समझ कर रखना पड़ता है। हमेशा डर लगा रहता है कि यह निर्णय सही होगा या गलत! हमें लेकर यह डर हमसे अधिक हमारे माता-पिता को रहता है। उन्हें हमेशा डर रहता है कि बच्चे किसी गलत रास्ते पर न चले जाएं, कहीं खो न जाएं, बच्चों के साथ कुछ गलत न हो जाए। दोस्तों माता-पिता चाहते हैं कि वे अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनाएं। उन्हें इतना अच्छा बनाएं कि वे किसी गलत राह पर, भूल कर भी ना जाएं। उनके दूसरों के साथ अच्छे संबंध हों। वे जीवन में सफल बनें। कभी किसी दूसरे पर निर्भर ना हों। अपने पैरों पर खड़े हों। बस ये ही हैं, माता-पिता के सपने।

हाँ मैं मानती हूँ कि इस सपनों को पूरा करने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी होगी। अपने आप को बदलना होगा। पर दोस्तों… जीवन में बिना मेहनत के सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। आज हम मेहनत से डरते हैं। मेहनत से अपना जी चुराते हैं, पर जरा सोचो! जब हम अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करेंगे, तब मन को कितनी शांती मिलेगा। हमारे माता-पिता को कितना अच्छा लगेगा। उनके चेहरे खुशी से खिल जाएंगे और वे पल….., सच मानो हमारी जिंदगी के सबसे हसीन पल होंगें।

 

दोस्तों ज़रा सोचो, जब हम अपने माता-पिता से झूठ बोलेंगे। उनसे कोई बात छुपाएँगे। वही झूठ, वही बात, जब उन्हें कहीं और से पता चलेगी। उन्हें कितना बुरा लगेगा, जब उन्हें पता चलेगा कि उनके बच्चे ही उनसे बातें छुपा रहे हैं। झूठ बोल रहे हैं। उनका विश्वास तोड़ रहे हैं। उनके दिल को कितनी ठेस पहुँचेगी।

हमारे माता-पिता हमारी देखभाल बचपन से करते आए हैं। हमारी हर जरूरत को पूरा करते आए हैं। दोस्तों हमारा भी फर्ज बनता है कि जब उनको हमारी जरूरत पड़े हम उनकी मदद करें। दोस्तों कुछ बच्चे अपने माता-पिता को केवल बोझ मानते हैं। उनको वृद्धाश्रम में भेज देते हैं। हमारी इस नई पीढ़ी को समझना होगा कि हमें किस राह पर जाना है। दोस्तों समय लौटकर आता है। घड़ी घूमकर फिर वहीं आकर रुकती है। आज हम बच्चे हैं, कल हम जवान होंगें और फिर वही बुढ़ापा भी आना है, जो आज हमें बोझ लगता है। अंत में मैं केवल इतना ही कहना चाहती हूँ, “माता-पिता से बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं है, भगवान भी नहीं।”

आर्ची गोयल

 

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