हिमालय की बेटियाँ

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक वसंत में संकलित पाठ ‘हिमालय की बेटियाँ’ पर आधारित वर्कशीट।

प्रश्न – अवतरण के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

हिमालय की बेटियाँ

1. मैं हैरान था कि यही दुबली-पतली गंगा, यही यमुना, यही सतलुज समतल मैदानों में उतरकर विशाल कैसे हो जाती हैं! इनका उछलना और कूदना, खिलखिलाकर लगातार हँसते जाना, इनकी यह भाव-भंगी, इनका यह उल्लास कहाँ गायब हो जाता है मैदान में जाकर? किसी लड़की को जब मैं देखता हूँ, किसी कली पर जब मेरा ध्यान अटक जाता है, तब भी इतना कौतूहल और विस्मय नहीं होता, जितना कि इन बेटियों की बाललीला देखकर!

2. खेलते-खेलते जब ये जरा दूर निकल जाती हैं तो देवदार, चीड़, सरो, चिनार, सफेदा, कैल के जंगलों में पहुँचकर शायद इन्हें बीती बातें याद करने का मौका मिल जाता होगा। कौन जाने, बुइा हिमालय अपनी इन नटखट बेटियों के लिए कितना सिर धुनता होगा! बड़ी-बड़ी चोटियों से जाकर पूछिए तो उत्तर में विराट मौन के सिवाय उनके पास और रखा ही क्या है?

1. लेखक हैरान क्यों था ?

2. पहाड़ पर नदियों का कौन-सा रूप देखने को मिलता है ?

3. मैदान में नदियों के रूप में क्या-क्या बदलाव आ जाते हैं ?

4. यहाँ बेटियाँ किन्हें और क्यों कहा गया है ?

5. नदियाँ खेलते खेलते कहाँ पहुँच जाती हैं ?

6. नदियाँ जंगलों में पहुँच कर कौनसी बातें याद करती होंगी ?

7. हिमालय किसके लिए अपना सिर धुनता होगा ?

8. बड़ी-बड़ी चोटियाँ नदियों के विषय में क्या कोई उत्तर देती हैं ?

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

भगवान के डाकिए

मन करता है

झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

राख की रस्सी

लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

सबसे अच्छा पेड़

साथी हाथ बढ़ाना

सूरदास के पद

हिमालय की बेटियाँ