अपठित गद्यांश कक्षा – 4 के लिए

1. गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

             पहाड़ी गाँवों में अक्सर बाघ का डर बना रहता है। जंगल कटने के कारण शिकार की तलाश में बाघ कभी-कभी गाँव तक पहुँच जाता है। गेंवली गाँव में एक बार यही हुआ। एक बाघ ने गाँव में घुसकर एक गाय को मार डाला। सुबह होते ही यह खबर पूरे गाँव में फैल गई। गाँव के लोग डरे कि यह बाघ कहीं फिर से आकर दूसरे पालतू जानवरों और किसी आदमी को ही अपना शिकार न बना ले। गाँव के लोग गोपाल आश्रम गए और उन लोगों ने मीरा बहन को अपनी चिंता बताई।

             गाँव के लोगों ने अंत में तय किया कि बाघ को कैद कर लिया जाए। उसे कैद करने के लिए उन्होंने एक पिंजड़ा बनाया। पिंजड़े के अंदर एक बकरी बाँधी। योजना यह थी कि बकरी का मिमियाना सुनकर बाघ पिंजड़े की तरपफ़ आएगा। पिंजड़े का दरवाजा इस प्रकार खुला हुआ बनाया गया था कि बाघ के अंदर घुसते ही वह दरवाजा झटके से बंद हो जाए। शाम होने तक पिंजड़े को ऐसी जगह पर रख दिया गया जहाँ बाघ अक्सर दिखाई देता था। यह जगह मीरा बहन के गोपाल आश्रम से ज्यादा दूर नहीं थी। रात बीती। सुबह की रोशनी होते ही लोग पिंजड़ा देखने निकल पड़े। उन्होंने दूर से देखा कि पिंजड़े का दरवाजा बंद है। वे यह सोचकर बहुत खुश हुए कि बाघ जरूर पिंजड़े में फँस गया होगा लेकिन जब वे पिंजड़े के पास पहुँचे तो क्या देखते हैं पिंजड़े में बाघ नहीं था!

(क) बाघ गाँव में क्यों आ आते थे ?

(ख) बाघ ने किसे मार डाला था ?

(ग) पूरे गाँव में क्या ख़बर फैल गई थी ?

(घ) लोगों ने किसे अपनी चिंता बताई ?

(ङ) पिंजड़े के अन्दर किसे बाधा गया था ?

(च) पिंजड़े का दरवाजा कैसा था ?

(छ) पिंजड़े को कहाँ रखा गया था ?

(ज) मीरा बहन कहाँ रहती थी ?

(झ) लोग क्या सोचकर खुश हो गए थे ?

(ञ) पिंजड़े के पास पहुंचकर लोगों ने क्या देखा ?

 

  1. अवतरण को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

झब्बर-झब्बर बालों वाले

गुब्बारे से गालों वाले

लगे दौड़ने आसमान में

झूम-झूम कर काले बादल।

कुछ जोकर-से तोंद फुलाए

कुछ हाथी-से सूँड़ उठाए

कुछ ऊँटों-से कूबड़ वाले

कुछ परियों-से पंख लगाए

आपस में टकराते रह-रह

शेरों से मतवाले बादल।

कुछ तो लगते हैं तूफानी

कुछ रह-रह करते शैतानी

कुछ अपने थैलों से चुपके

झर-झर-झर बरसाते पानी

नहीं किसी की सुनते कुछ भी

ढोलक-ढोल बजाते बादल।

(क) बादल आसमान में दौड़ कैसे लगाते हैं ?

(ख) बादल आपस में किसकी तरह टकराते हैं ?

(ग) बादल झर-झर पानी कहाँ से बरसाते हैं ?

(घ) किसी की सुने बिना बादल क्या करते रहते हैं ?

 

  1. अवतरण को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

             एक दिन ख्वाजा सरा ने बीरबल को मूर्ख साबित करने के लिए बहुत साचे-विचार कर कुछ मिुश्कल प्रश्न सोच लिए। उन्हें विश्वास था कि बादशाह के उन प्रश्नों को सुनकर बीरबल के छक्के छूट जाएँगे और वह लाख कोशिश करके भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाएगा। फिर बादशाह मान लेगा कि ख्वाजा सरा के आगे बीरबल कुछ नहीं है। ख्वाजा साहब अचकन-पगड़ी पहनकर दाढ़ी सहलाते हुए अकबर के पास पहुँचे और सिर झुकाकर बोले, बीरबल बड़ा

मैं चाहता हूँ कि आप मेरे तीन सवालों के जवाब पूछकर उसके दिमाग की गहराई नाप लें। उस नकली अक्ल-बहादुर की कलई खुल जाएगी।

(क) ख्वाजा सरा ने बीरबल को मूर्ख साबित करने के लिए क्या सोच-विचार किया था ?

(ख) ख्वाजा सरा को क्या विशवास था ?

(ग) ख्वाजा सरा क्या पहनकर अकबर के पास गए थे ?

(घ) ख्वाजा सरा ने बीरबल से कितने सवाल पूछने को कहा ?

 

  1. अवतरण को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

              हुदहुद एक बहुत ही सुन्दर पंछी है। इसके  शरीर का सबसे सुंदर भाग इसके  सिर की कलगी होती है। वैसे तो यह इसे समेटे रहता है। पर जैसे ही किसी तरह की आवाज़ होती है, यह चौकन्ना होकर परों को फैला लेता है। तब यह कलगी देखने में हू-ब-हू किसी सुंदर पंखी जैसी लगने लगती है। हुदहुद का सारा शरीर रंग-बिरंगा और चटकीला होता है। पंख काले-काले होते हैं जिन पर मोटी सफ़ेद धारियाँ बनी होती हैं। गर्दन का अगला हिस्सा बादामी रंग का होता है। चोटी भी बादामी रंग की होती है, मगर उसके  सिरे काले और सफ़ेद होते हैं। दुम का भीतरी हिस्सा सफ़ेद और बाहरी हिस्सा काले रंग का होता है। चोंच पतली, लंबी तथा तीखी होती है। इस चोंच से यह आसानी से ज़मीन के भीतर छिपे हुए कीड़े मकोड़ों को ढूँढ निकालता है। इसकी चोंच नाखून काटने वाली ‘नहरनी से बहुत मिलती है और शायद इसीलिए कहीं-कहीं इसे ‘हजामिन चिड़िया’ के  नाम से भी पुकारते हैं। हुदहुद हमारे देश के सभी भागों में पाए जाते हैं।

(क) हुदहुद के शरीर का सबसे सुन्दर अंग कौन-सा है ?

(ख) किसी आव़ाज को सुनकर हुदहुद क्या करता है ?

(ग) हुदहुद के पंख कैसे होते हैं ?

(घ) हुदहुद की दुम कैसी होती है ?

(ङ) हुदहुद अपनी चोंच से किन्हें ढूँढ निकालताहै ?

(च) हुदहुद को ‘हजामिन चिड़िया’ के नाम से क्यों पुकारा जाता है ?

 

 

5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी पाठ्य पुस्तक ‘रिमझिम-4’ में से खोजकर लिखो-

  1. दिनेश घर में बैठा क्या कर रहा था ? (पेज न. 11) 
  2. क्यारियों में क्या-क्या लगा हुआ था ? (पेज न. 11) 
  3. छत की मुंडेर से लेकर नीचे तक क्या चिलचिला रही थी ?(पेज न. 12) 
  4. दीपक ने कौनसा निशान दिखाते हुए गेंद को अपनी बताया ?(पेज न. 15)
  5. बच्चे स्कूटर के पीछे भागते-भागते क्यों रुक गए थे ? (पेज न. 16) 
  6. नसीरुद्दीन के दोस्तों ने क्या फैसला किया ? (पेज न. 42) 
  7. एक दोस्त भागा-भागा क्या खरीदकर लाया ? (पेज न. 42) 
  8. नसीरुद्दीन ने दूसरा निशाना किसका बताया ? (पेज न. 43)

 

6. दिए गए अवतरण को पढ़िए एवम् प्रश्न का उत्तर दीजिए –

          सतीस को अँधेरे में एक और बन्दूकधारी डाकू दिख गया। सतीस ने ऐसा निशाना साधकर एक ईंट फेंकी कि उस डाकू का जबड़ा टूट गया। वह बिलबिलाकर गिर पड़ा। उसने क्रोध से सतीस को देखा। जलती हुई घास के उजाले में दोनों की आँखे चार हुईं। सतीस ने पहली बार ऐसी क्रूर और क्रुद्ध आँखें देखी थीं। अभी सतीस ने एक ईंट उठाई ही थी कि ‘धाँय’ की आवाज़ हुई।

 (क) सतीस ने पहली बार क्या देखा था ?

 

7. दिए गए अवतरण को पढ़िए एवम् प्रश्न का उत्तर दीजिए –

         मौसी खुशी-खुशी सबके जर्जर सामानों को रखतीं। उन जर्जर सामानों में से वे उन सामानों को अलग कर लेतीं, जो भविष्य में काम दे सकती थीं। बिलकुल बेकार सामानों को वे सड़क पर रखे म्युनिसपैलिटी के कूड़ेदान में गिरा देती थीं। पुराने सामानों का संग्रह करने में उन्हें बड़ा आनन्द मिलता था। इससे उनका अकेलापन भी दूर हो जाता था।

 (क) मौसी सामानों को अलग-अलग क्यों करती थी ?

 

8. दिए गए अवतरण को पढ़िए एवम् प्रश्न का उत्तर दीजिए –

          नीना को चित्र बनाने का बड़ा शौक था। स्कूल की चित्रांकन परीक्षा में अंक भी उसे बहुत अच्छे मिलते थे। बस, उसने गणित की कॉपी उठाकर अलग रख दी और एक कागज़ पर पेन्सिल से रेखाएँ बनाने लगी। पहले उसने एक बहुत सुन्दर-सी चिड़िया बनाई। फिर कुछ फूल बनाए। उसके बाद उसने एक आदमी की तस्वीर बनाई। उसे देखकर वह स्वयं ज़ोर से हँस पड़ी। उसकी वह हँसी उसकी माँ ने सुनी।

 

नीना की हँसी सुनकर वह चौंक पडीं। वे जल्दी-जल्दी उसके पास आईं। उन्हें आते देखकर नीना ने झटपट वह कागज़ छिपा दिया, जिसपर उसने चित्र बनाए थे। माँ ने पूछा, “सवाल हल कर लिया ?”

(क) नीना ने कागज़ क्यों छिपा दिया ?

 

9. दिए गए अवतरण को पढ़िए एवम् प्रश्न का उत्तर दीजिए –

             तब अर्जुन ने एक ऊपरी शाखा की ओर हाथ बढ़ाया। इस बार उन्हें कुछ गुनगुनाहट-सी सुनाई पड़ी। आँखें ऊपर उठाई तो पत्ते-पत्तियों का कुछ गोल-मटोल-सा दिखाई पड़ा, जो एक मुलायम रेशे से शाखा से लटका हुआ था। यह रेशम का कोया था, जो गुनगुनाकर कह रहा था, “नहीं, मत तोड़ो यह शाखा, प्यारे भैया! बरबाद हो जाएगा हमारा यह घोंसला, जिसे हमने परिश्रम से सँवारा है। हमने पत्ता-पत्ता जुटाया, उन्हें गूँथा और उनके बीच रेशम के कीड़े छोड़े कि वे बीच-बीच में अलगाव के लिए परदे बुन सकें। अपनी रानी और अपने कामगार, अपने सैनिक, अपने बच्चों के लिए हमने घोंसले सुरक्षित कर लिए हैं। तुम्हें तो ये छोटे-छोटे घोंसले ही दिख रहे हैं, जिन्हें हमने बनाया है। जिन कीड़े-मकोड़ों से हमें दूध मिलता है, उनके भी घर इनमें हैं। मत तोड़ो यह शाखा भैया! हमपर दया करो। हमारा यह पूरा कुटुम्ब तुम्हारा आभार मानेगा।“

(क) घोंसलों में कौन-कौन रह रहे थे ?

 

10. दिए गए अवतरण को पढ़िए एवम् प्रश्न का उत्तर दीजिए –

आरुणि –     गुरुदेव! मेरी एक जिज्ञासा है।

धौम्य ऋषि – जिज्ञासा! कैसी जिज्ञासा?

आरुणि –     गुरुदेव! मैं आपके मुख पर चिन्ता की रेखाएँ देख रहा हूँ। क्या आप मुझे कारण पूछने की आज्ञा प्रदान करेंगे?

धौम्य ऋषि – वत्स आरुणि! तुम मेरे प्रिय शिष्य हो। कारण जानने की इच्छा रखने का तुम्हें अधिकार है। आज वर्षा होने की सम्भावना है। वर्षा होने पर खेत में जल का संग्रह अवश्य होना चाहिए। अभी तक खेत में मेड़ नहीं बाँधी गई।

(क) गुरुदेव की चिन्ता का क्या कारण था ?

 

11. गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

              गर्मी की छुटियाँ थीं। दोपहर के समय दिनेश घर में बैठा कोई कहानी पढ़ रहा था। तभी पेड़ के पत्तों को हिलाती हुई कोई वस्तु धम से घर के पीछे वाले बगीचे में गिरी। दिनेश आवाज से पहचान गया कि वह वस्तु क्या हो सकती है। वह एकदम से उठकर बरामदे की चिक सरका कर बगीचे की ओर भागा। अरे अरे, बेटा कहाँ जा रहा है? बाहर लू चल रही है। दिनेश की माँ मशीन चलाते-चलाते एकदम ज़ोर से बोलीं। परन्तु दिनेश रुका नहीं। उसने पैरों में चप्पल भी नहीं पहनी। जून का महीना था। धरती तवे की तरह तप रही थी। पर दिनेश को पैरों के जलने की भी चिंता नहीं थी। वह जहाँ से आवाज आई थी, उसी ओर भाग चला। सामने की क्यारी में भिन्डियों के ऊँचे-ऊँचे पौधे थे। एक ओर सीताफल की घनी बेल फैली हुई थी। क्यारियों के चारों ओर हरे-हरे केले के वृक्ष लहरा रहे थे। दिनेश ने जल्दी-जल्दी भि्ांडियों के पौधों को उलटना-पलटना आरम्भ किया। जब वहाँ कुछ नहीं मिला तो उसने सारी सीताफल की बेल छान मारी। बराबर में ही छोटे-छोटे गड़े बना रखे थे। ढूँढ़ते-ढूँढ़ते जब उसकी निगाह उधर गई तो उसने देखा कि गइे के ऊपर ही एक बिल्कुल नई चमचमाती किरमिच की गेंद पड़ी है।

  1. पाठ का नाम बताओ।
  1. कौनसी छुटियाँ पड़ी हुई थी ?
  1. दिनेश घर में बैठा क्या कर रहा था ?
  1. दिनेश आव़ाज से क्या पहचान गया था ?
  1. दिनेश आव़ाज सुनकर किस और भागा ? 
  1. दिनेश की माँ क्या कर रही थी ?
  1. सामने की क्यारियों में किसके पौधे लगे हुए थे ?
  1. बगीचे में किसकी बेल लगी हुई थी ? 
  1. क्यारियों के चारों ओर क्या लगा हुआ था ? 
  2. दिनेश को किरमिच की गेंद कहाँ मिली ?

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक पर आधारित अपठित गद्यांश के नीचे दिए गए हैं।

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

भगवान के डाकिए

मन करता है

झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

राख की रस्सी

लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

सबसे अच्छा पेड़

साथी हाथ बढ़ाना

सूरदास के पद

हिमालय की बेटियाँ

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