अपठित गद्यांश कक्षा – 5 के लिए

1. अवतरण को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –    

Download as PDF and send your friends via WhatsApp. Share via Whatsapp

               तभी बिशन को भारी-भरकम जूतों की आवाज़ सुनाई दी, जो तेजी से उसके पास आती जा रही थी। पीछे से आ रहा शिकारी गुस्से में ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था, फ्मैं तुझे देख लूँगा, तू मेरा शिकार चुराकर नहीं ले जा सकता!य् बिशन के लिए आगे निकल भागने का रास्ता नहीं था। अगर वह सड़क से जाता तो शिकारी को साप़्ाफ़ दिखाई दे जाता। इसलिए उसने खेतों के छोटे रास्ते से जाना तय किया। खेतों से आगे के रास्ते में काँटेदार झाड़ियाँ थीं। बिशन उसी रास्ते पर घुटनों के बल चलने लगा। बहुत सँभलकर चलने पर भी उसके हाथ-पाँव पर काँटों की बहुत-सी खरोंचें उभर आईं। खरोंचों से खून भी निकलने लगा। उसकी कमीज़ की एक आस्तीन भी फट गई।

वह जानता था कि कमीज़ फटने पर उसे माँ से डाँट खानी पड़ेगी। पर बिशन को इस बात का संतोष था कि वह अब तक तीतर की जान बचाने में कामयाब रहा। झाड़ी से बाहर आकर वह सोचने लगा कि कैसे पहाड़ी के कोने-से फिसलकर नीचे पहुँचा जाए, लेकिन उस कोने में घास बहुत कांटेदार थी और ओस के कारण फिसलन भी। बिशन थककर वहीं एक किनारे बैठ गया। अभी वह बैठा ही था कि उसे पाँवों की आहट सुनाई दी। आहट सुनते ही वह उठकर दौड़ पड़ा। दौड़ते-दौड़ते वह आधी पहाड़ी पार कर चुका था। उसके कपड़े पसीने से तर-ब-तर हो गए, फिर भी वह रुका नहीं और किसी तरह कर्नल के प़्ाफ़ार्म हाउस के पिछवाड़े पहुँच ही गया। पिछवाड़े दरवाजा खुला था। उसने ताड़ के पेड़ का सहारा लिया और प़्ाफ़ार्म हाउस के अंदर पहुँच गया। तीतर को वह बड़ी सावधानी के साथ अपने सीने से लगाए हुए था।

  • बिशन क्यों भाग रहा था ?
  • बिशन ने खेतों के छोटे रस्ते से जाना क्यों तय किया ?
  • खेतों का रास्ता कैसा था ?
  • कमीज़ की आस्तीन फटने पर भी बिशन को किस बात की खुशी थी ?
  • बिशन फार्म हाउस के अन्दर कैसे और किसके सहारे से पहुँचा ?

 

2. अवतरण को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

            लोनपो गार तिब्बत के बत्तीसवें राजा सौनगवसैन गांपो के मंत्री थे। वे अपनी चालाकी और हाजिरजवाबी के लिए दूर-दूर तक मशहूर थे। कोई उनके सामने टिकता न था। चैन से जि़ंदगी चल रही थी। मगर जब से उनका बेटा बड़ा हुआ था उनके लिए चिता का विषय बना हुआ था। कारण यह था कि वह बहुत भोला था। होशियारी उसे छूकर भी नहीं गई थी। लोनपो गार ने साचे “मेरा बेटा बहुत सीधा-सादा है। मेरे बाद इसका काम कैसे चलेगा!” एक दिन लोनपो गार ने अपने बेटे को सौ भेड़ें देते हुए कहा, “तुम इन्हें लेकर शहर जाओ।

मगर इन्हें मारना या बेचना नहीं। इन्हें वापस लाना सौ जौ के बोरों के साथ। वरना मैं तुम्हें घर में नहीं घुसने दूँगा।“ इसके बाद उन्होंने बेटे को शहर की तरफ रवाना किया।

  • लोनपो गार कौन था ?
  • लोनपो गार की चिंता का विषय क्या था ?
  • लोनपो गार का बेटा कैसा था ?
  • लोनपो गार ने अपने बेटे को सौ भेड़े देते हुए क्या करने को कहा ?

 

3. अवतरण को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

             जब वह बहुत छोटा था, तभी उसने संयोग से किले का गुप्त द्वार खोजो था। लेकिन न उसने किसी को बताया था और न ही इसके बारे में किसी और को पता था। बस, वह जब चाहे गुप्त मार्ग से किले में जा पहुँचता और खेल-कूदकर उसी रास्ते से वापस आ जाता। इस गुप्त मार्ग की जानकारी के बिना इस किले पर चढ़ाई करना अत्यंत कठिन था। बालू समझ गया था कि शिवाजी ने इसीलिए इसे अपना गढ़ बनाया, क्योंकि वह इस तरह बना हुआ था कि कोई भी शत्रु इसपर अचानक आक्रमण नहीं कर सकता था।

  • बालू ने क्या रहस्य जान लिया था ?
  • शिवाजी किले को अपना गढ़ क्यों बनाना चाहते थे ?

 

4. अवतरण को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

              अमीर खुसरो न केवल साधारण जन के लिए कविताएँ लिखते थे, बल्कि उस समय के बादशाहों की प्रशंसा में भी शायरी लिखते थे। वे युद्ध में भी भाग लेते थे और रण क्षेत्र में अपनी बहादुरी का जौहर भी दिखलाते थे उनकी कविता और वीरता से प्रभावित होकर अनेक बादशाहों ने उन्हें अपने दरबार में रखा। इस प्रकार प्रजा से लेकर राजा तक अर्थात् झोंपड़ी से लेकर महल तक अमीर खुसरो की प्रसिद्धि फैल गई। उनकी प्रसिद्धि का एक कारण उनका संगीतकार होना था। वे संगीत के ज्ञाता थे। उन्हें राग-रागिनियों का अच्छा ज्ञान था। उन्होंने कई राग-रागिनियों की रचना भी की।

  • आमीर खुसरो किनके लिए कविताएँ लिखते थे ?
  • बादशाह आमीर खुसरो को अपने दरबार में क्यों रख लेते थे ?

 

5. अवतरण को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए –

            मैंने ज्योंही उसके ऊपर पैर रखा, वह नीचे खिसक गई और मैं धम्म से मुँह बाए हुए एक बड़ी दरार में जा गिरा। यह दरार बहुत बड़ी थी और कोई चीज उसमें बील्कुल नीचे पहुँचकर हजारों वर्ष बाद तक भूगर्भशास्त्रियों की खोज के लिए इत्मीनान के साथ सुरक्षित रह सकती थी।

लेकिन मेरे हाथ से रस्सी नहीं छूटी और मैं दरार की बाजू को पकड़े रहा और ऊपर खींच लिया गया! इस घटना से हम लोगों के होश ढीले हो गए थे, फिर हम लोग चलते गए। लेकिन दरारों की और चौड़ाई आगे जाकर और बढ़ गई।

  • लेखक की जान कैसे बच गई ?

 

6. अवतरण को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए –

          मैंने समझ लिया कि आत्महत्या का विचार करना सहज है, आत्महत्या करना सहज नहीं है। आत्महत्या के निश्चय का एक परिणाम यह हुआ कि हम दोनों को जूठी सिगरेट पीने और पैसे चुराने तथा उससे खरीदकर सिगरेट पीने की आदत ही जाती रही। बड़े होने पर मुझे कभी सिगरेट पीने की इच्छा ही नहीं हुई। मेरी यही धारणा रही कि यह आदत जंगली है, गंदी और हानिकारक है।

  • आत्महत्या के डर का गांधीजी पर क्या प्रभाव पड़ा ?

 

7. कविता को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजीए-

गुरु एक थे और था एक चेला,

चले घूमने पास में था न धेला।

चले चलते-चलते मिली एक नगरी,

चमाचम थी सड़कें चमाचम थी डगरी।

मिली एक ग्वालिन धरे शीश गगरी,

गुरु ने कहा तेज़ ग्वालिन न भग री।

बता कौन नगरी, बता कौन राजा,

कि जिसके सुयश का यहाँ बजता बाजा।

कहा बढ़के ग्वालिन ने महाराज पंडित,

पधारे भले हो यहाँ आज पंडित।

यह अंधेर नगरी है अनबूझ राजा,

टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।

गुरु ने कहा-जान देना नहीं है,

मुसीबत मुझे मोल लेना नहीं है।

न जाने की अंधेर हो कौन छन में?

यहाँ ठीक रहना समझता न मन में।

  • कविता का क्या नाम है ?
  • नगरी की सड़कें कैसी थी ?
  • गुरु ने ग्वालिन से क्या पूछा ?
  • नगरी में भाजी का क्या रेट (मूल्य) था ?
  • गुरु को क्या अच्छा नहीं लग रहा था ?

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक पर आधारित अपठित गद्यांश के नीचे दिए गए हैं।

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

भगवान के डाकिए

मन करता है

झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

राख की रस्सी

लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

सबसे अच्छा पेड़

साथी हाथ बढ़ाना

सूरदास के पद

हिमालय की बेटियाँ

Download as PDF and send your friends via WhatsApp. Share via Whatsapp

8 comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *