अपठित गद्यांश कक्षा – 6 के लिए

1. अवतरण को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

             चने जोर गरम और अनारदाने का चूर्ण! हाँ, चने जोर गरम की पुड़िया जो तब थी, वह अब भी नजर आती है। पुराने कागजों से बनाई हुई इस पुड़िया में निरा हाथ का कमाल है। नीचे से तिरछी लपेटते हुए ऊपर से इतनी चौड़ी कि चने आसानी से हथेली पर पहुँच जाएँ। एक वक्त था जब फ़िल्म का गाना-चना जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार, चना जोर गरम-यह गाना उन दिनों स्कूल के हर बच्चे को आता था।

कुछ बच्चे पुड़िया पर तेज मसाला बुरकवाते। पूरा गिरजा मैदान घूमने तक यह पुड़िया चलती। एक-एक चना-पापड़ी मुँह में डालने और कदम उठाने में एक खास ही लय-रफतार थी।

  • लेखिका को अपने बचपन की कौन-सी बातें आज भी याद आती हैं ?         
  • पुड़िया किस चीज से बनाई जाती थी ?                                 
  • पुड़िया की क्या विशेषता थी ?                                  
  • फ़िल्म का कौन-सा गाना बच्चों में लोकप्रिय हो गया था ?      
  • पूरा गिरजा मैदान घूमने पर भी क्या खत्म नहीं होती थी ?

 

2. दिए गए अवतरण को पढ़िए तथा प्रश्न का उत्तर दीजिए –

             व्यायाम करने में शरीर के अन्दर की गंदगी पसीने के रास्ते बाहर निकल जाती है और रक्त शुद्ध हो जाता है। व्यायाम करने वालों का शरीर चमकता रहता है। अच्छे स्वास्थ्य से अनेक प्रकार की सुख सुविधाएँ प्राप्त की जा सकती हैं। व्यायाम न करने वाले मनुष्य आलसी बन जाते हैं। आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कहा गया है। आलसी व्यक्ति जीवन में हर क्षेत्र में असफल रहतें हैं। व्यायाम के अभाव में शरीर भोझ-सा प्रतीत होने लगता है।

  • व्यायाम करने और न करने वाले मनुष्य में दो अंतर बताओ ?

 

3. दिए गए अवतरण को पढ़िए तथा प्रश्न का उत्तर दीजिए –

                कम्प्यूटर ने फाइलों की संख्या को कम कर दिया है। कम्प्यूटर कार्यकुशल होते हैं। इनके संचालन में गलती की सम्भावना बहुत कम होती है। लाखों-करोड़ों जटिल गणनाएँ, जोड़ना, घटाना, भाग, गुणा बील्कुल ठीक और अतिशीघ्र करने के लिए कम्प्यूटर की सहायता ली जा सकती है। संसार को जोड़ने का स्वप्न केवल कम्प्यूटर ने ही पूर्ण किया है। आज इंटरनेट पर ‘वर्ल्ड वाइड वेब’ के माध्यम से हम समूचे विश्व के अंग बन सकते हैं। इंटरनेट ने हर प्रांत, हर नगर की दीवारों को ध्वस्त करते हुए हमें विश्व से जोड़ दिया है। अब हम विश्व नागरिक बनने की ओर अग्रसर हैं। हम कोई भी सूचना विश्व किसी भी स्थान में लगे कम्प्यूटर पर भेज सकते हैं इस सूचना व्यवस्था को ‘ई-मेल’ कहते हैं।

  • कम्प्यूटर के चार लाभ बताओ ?

 

4. दिए गए अवतरण को पढ़िए तथा प्रश्न का उत्तर दीजिए –

              मुक्त आकाश में विचरण करने वाले पंछी सोने के पिंजरे में भी रहना नहीं चाहते। बंधन से वह मुक्ति चाहता है। खुली हवा में साँस लेना मनुष्य को ही नहीं पक्षियों को भी बेहद प्रिय लगता है।

 

आजादी सभी को प्रिय लगती है। हमारे देश के इतिहास में आज़ादी पाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीरों के असंख्य उदाहरण मिलते हैं। सन 1947 से पूर्व हमारा देश परतंत्र था। अंग्रेजों ने हमें दासता की जंजीरों में जकड़ रखा था। भारत के लोगों ने स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए निरंतर संघर्ष किया।

  • मुक्त आकाश में विचरण करने वाले पंछी सोने के पिंजरे में भी क्यों रहना नहीं चाहते?

 

5. दिए गए अवतरण को पढ़िए तथा प्रश्न का उत्तर दीजिए –

             ढोल-घंटे, बजा-बजकर भक्तगण नाचने लगे। लालू ने नाचते-झूमते भक्तजनों को देखा। उसने सिन्दूर का तिलक बकरे को लगाया। एक भयंकर हुँकार भरी। लोग आँखे मूँदकर काली का जाप कर रहे थे। हुँकार सुन सारा कोलाहल शांत हो गया। तभी लालू का खड्ग ऊपर उठा और ज़ोर से नीचे गिरा। ढोल-घंटे बजते रहे। दूसरा बकरा पास ही खड़ा धीरे-धीरे काँप रहा था। भयंकर आंर्तनाद हुआ और उसकी भी बलि दे दी गई। जैसे ही फिर ढोल तेज बजे लालू ज़ोर से चिल्लाया, “और बकरे कहाँ हैं ?”

  • भक्तगण क्या कर रहे थे ?

 

6. दिए गए अवतरण को पढ़िए तथा प्रश्न का उत्तर दीजिए –

              जल में अनेक पदार्थ घुल जाते हैं, जैसे- चीनी, नमक आदि। जल ऐसा द्रव है, जिसमें किसी भी अन्य द्रव की अपेक्षा पदार्थ को घोलने की क्षमता बहुत अधिक होती है। अधिकतर पदार्थों की कुछ-न-कुछ मात्रा जल में घुल सकती है। भोजन के उन सभी भाग का हमारे शरीर में पाचन होता है, जो जल में घुलनशील होता है। इस घोल का पूरे शरीर में पाचन होता है। जल के घोलक गुण की कुछ हानियाँ भी हैं। यदि हम टिन की बाल्टी में जल रख दें और 3-4 घंटे बाद उसको पिएँ तो जल में टिन का स्वाद आने लगता है।

  • जल के घोलक गुण की क्या हानियाँ- लाभ हैं ?

 

7. कविता को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

साथी हाथ बढ़ाना

एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना।

साथी हाथ बढ़ाना।

हम मेहनत वालों ने जब भी, मिलकर कदम बढ़ाया

सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया

फ़ौलादी हैं सीने अपने, फ़ौलादी हैं बाँहें

हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें

साथी हाथ बढ़ाना।

मेहनत अपने लेख की रेखा, मेहनत से क्या डरना

कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना

अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक

अपनी मंजिल सच की मंजिल, अपना रस्ता नेक

साथी हाथ बढ़ाना।

एक से एक मिले तो कतरा, बन जाता है दरिया

एक से एक मिले तो जर्रा, बन जाता है सेहरा

एक से एक मिले तो राई, बन सकती है परबत

एक से एक मिले तो इंसाँ, बस में कर ले किस्मत

साथी हाथ बढ़ाना।

  • कवि और कविता का नाम लिखिए ?
  • मेहनत वालों ने जब भी मिलकर क़दम बढ़ाया है तो क्या हुआ है ?
  • अपनी मंजिल और रास्ता कैसा है ?
  •  एक से एक मिलने पर कौन क्या बन जाता है ?
  • साथी हाथ बढ़ाना का क्या अर्थ है ?

 

8. अवतरण को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

           हमारी यह धरती लगभग पाँच अरब साल पुरानी है। दो-तीन अरब साल तक इस धरती पर किसी प्रकार के जीव-जंतु नहीं थे। फिर करोड़ों साल तक केवल जानवरों और वनस्पतियों का ही इस धरती पर राज्य रहा। आदमी ने इस धरती पर कोई पाँच लाख साल पहले जन्म लिया। धीरे-धीरे उसका विकास हुआ।

            अक्षरों की खोज के साथ एक नए युग की शुरुआत हुई। आदमी अपने विचार और अपने हिसाब-किताब को लिखकर रखने लगा। तबसे मानव को ‘सभ्य’ कहा जाने लगा। आदमी ने जबसे लिखना शुरू किया तबसे ‘इतिहास’ आरंभ हुआ। किसी भी कौम या देश का इतिहास तब से शुरू होता है जबसे आदमी के लिखे हुए लेख मिलने लग जाते हैं। इस प्रकार, इतिहास को शुरू हुए मुश्किल से छह हजार साल हुए हैं।

  • पाठ और लेखक का नाम लिखिए ?
  • धरती की प्रारंभिक दशा कैसी थी ?
  • मानव का धरती पर आगमन कब हुआ ?
  • अक्षरों की खोज मनुष्य की सबसे बड़ी खोज कैसे है ?
  • एक पीढ़ी के ज्ञान का लाभ दूसरी पीढ़ी को कैसे मिलता है ?

 

हिन्दी की पाठ्यपुस्तक पर आधारित अपठित गद्यांश के नीचे दिए गए हैं।

अकबरी लोटा

अक्षरों का महत्त्व

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसा सवाल वैसा जवाब

टिकट अलबम

दादी माँ

पानी की कहानी

बिशन की दिलेरी

भगवान के डाकिए

मन करता है

झब्बर-झब्बर बालों वाले

मिर्च का मज़ा

मीरा बहन और बाघ

रक्त और हमारा शरीर

राख की रस्सी

लाख की चूड़ियाँ

लोकगीत

वीर कुँवर सिंह

सबसे अच्छा पेड़

साथी हाथ बढ़ाना

सूरदास के पद

हिमालय की बेटियाँ