कर्म कारक

कर्म कारक

प्रश्न कर्म कारक किसे कहते हैं ?

उत्तर – वाक्य में हो रहे कार्य का फल अर्थात प्रभाव जिसपर पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। इसके लिए वाक्य में ‘को’ विभक्ति का प्रयोग किया जाता है। नीचे दिए गए उदाहरणों से आप इसे आसानी से समझ सकते हैं –

1. अध्यापक ने विद्यार्थी को पढ़ाया।

इस वाक्य में ‘अध्यापक’ कर्त्ता कारक है, क्योंकि काम करने वाला अध्यापक है। अध्यापक ने विद्यार्थी को पढ़ाने का कार्य किया है। इस वाक्य में ‘ने’ कर्ता कारक की विभक्ति का प्रयोग अध्यापक लिए हुआ है। और जो कार्य हुआ है उसका प्रभाव विद्यार्थी पर पड़ा है, क्योंकि क्योंकि कार्य का प्रभाव पड़ने पर कर्म कारक घटित होता है इसलिए इस वाक्य में विद्यार्थी कर्म कारक है। इस वाक्य में कर्म कारक की विभक्ती ‘को’ का प्रयोग विद्यार्थी के लिए हुआ है जो कि विद्यार्थी और किए गए कार्य पढ़ना में सम्बन्ध भी प्रकट करता है।

2. विराट ने बच्चे को खाना खिलाया।

इस वाक्य में ‘विराट’ कर्त्ता कारक है, क्योंकि काम करने वाला विराट है। विराट ने बच्चे को खाना खिलाने का कार्य किया है। इस वाक्य में ‘ने’ कर्ता कारक की विभक्ति का प्रयोग विराट लिए हुआ है। और जो कार्य हुआ है उसका प्रभाव बच्चे पर पड़ा है, क्योंकि कार्य का प्रभाव पड़ने पर कर्म कारक घटित होता है इसलिए इस वाक्य में विद्यार्थी कर्म कारक है। इस वाक्य में कर्म कारक की विभक्ती ‘को’ का प्रयोग बच्चे के लिए हुआ है जो कि बच्चे और किए गए कार्य खाना खाने में सम्बन्ध भी प्रकट करता है।

3. कल एक युवक ने खिड़की का काँच तोड़ दिया।

इस वाक्य में ‘युवक’ कर्त्ता कारक है, क्योंकि काम करने वाला युवक है। युवक ने काँच तोड़ने का कार्य किया है। इस वाक्य में ‘ने’ कर्ता कारक की विभक्ति का प्रयोग युवक लिए हुआ है। और जो कार्य हुआ है उसका प्रभाव खिड़की पर पड़ा है, क्योंकि कार्य का प्रभाव पड़ने पर कर्म कारक घटित होता है इसलिए इस वाक्य में खिड़की कर्म कारक है। इस वाक्य में कर्म कारक की विभक्ती ‘को’ का प्रयोग खिड़की के लिए हुआ है जो कि खिड़की और किए गए कार्य काँच तोड़ने में सम्बन्ध भी प्रकट करता है।

कर्म कारक की पहचान का सरल उपाय यह है कि अर्थ के आधार पर यह देखा जाए की वाक्य में जो कार्य हुआ है उसका प्रभाव किसपर पड़ा है। जिसपर कार्य का प्रभाव पड़ता है वह कर्म कारक कहलाता है।

कारक

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