निजता का अधिकार

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सुप्रीम कोर्ट के जजों मुख्य न्यायाधीश जे.एस. खेहर, जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस आर.के. अग्रवाल, जस्टिस आर.एफ़. नरीमन, जस्टिस ए.एम. सप्रे, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया है। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने पुराने फ़ैसलों निजता को मौलिक अधिकार नहीं मानना को ख़ारिज करते हुए कहा कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीने के अधिकार का हिस्सा है।

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस फ़ैसले पर कहा, ‘सरकार ने आधार कानून बनाया है, जिसमें समाज कल्याण की योजनाओं के लिए आधार की जानकारी देना ज़रूरी है। इस पर भी विचार किया जाएगा। अगर सरकार रेल टिकट और फ़्लाइट टिकट और दूसरी चीजों में भी आधार को ज़रूरी बनाती है तो इसके ख़िलाफ भी आवाज़ उठाई जाएगी।’ इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निजता का अधिकार संपूर्ण अधिकार नहीं है और इस पर सरकार रोक लगा सकती है।

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