हिन्दी व्याकरण

हिन्दी व्याकरण

प्रश्न – ‘व्याकरण’ किसे कहते हैं?

उत्तर – जिस पुस्तक से किसी भाषा अथवा शैली (डांस, संगीत आदि) के नियम और क़ानून पता चले उस पुस्तक को ‘व्याकरण’ कहा जाता है।

प्रश्न – ‘हिन्दी व्याकरण’ क्या है?

उत्तर – हिन्दी व्याकरण हिन्दी भाषा के उन नियमों के संग्रह को कहा जाता है जिससे हमें भाषा के शुद्ध उच्चारण और लेखन का ज्ञान होता है। व्याकरण से ही हमें ज्ञात होता है कि कोई शब्द वाक्य में कहाँ और किस रूप में प्रयोग होना चाहिए और उसका उच्चारण किस प्रकार करना है। व्याकरण को हम भाषा का संविधान कह सकते है जो भाषा का प्रयोग करने वालों का मार्गदर्शन करता है और बताता है कि क्या प्रयोग ग़लत है और क्या सही।

प्रश्न – क्या भाषा के लिए व्याकरण आवश्यक है?

उत्तर – हाँ! क्योंकि व्याकरण हम भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान कराता है।

प्रश्न – क्या सभी भाषाओं का व्याकरण होता है?

उत्तर – नहीं! केवल वे भाषाएँ जो प्रसिद्ध हैं, जिनका बहुत बड़ा साहित्य है उन्हीं भाषाओँ का व्याकरण होता है। क्षेत्रीय बोलियों का व्याकरण नहीं होता। इसका कारण यह है कि पहले भाषा या बोली बनती है उसके बाद उस भाषा के ज्ञाता उस भाषा का व्याकरण लिखते हैं जिससे आने वाले लोगों को भाषा का सही ज्ञान मिलता रहे।

हिन्दी व्याकरण से सम्बन्धित कुछ विषय नीचे दिए गए हैं –

भाषा

संज्ञा

लिंग

वचन

कारक

सर्वनाम

उपसर्ग

समास

विलोम शब्द

पर्यायवाची शब्द

विशेषण

संधि

मुहावरे

वाक्य के भेद

विराम चिह्न

संवाद लेखन

सूचना लेखन

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